............................................................................................................................................................................................................................................. चाणक्य प्लेस- साझा मं में आपका स्वागत है। आप चाणक्य प्लेस के समाचार, जानकारी, अपने आसपास और संस्थाओं की गतिविधियां, परेशानियां, शिकायतें, सुझाव, सन्देश, मुफ़्त वर्गीकृत विज्ञापन आदि प्रकाशन हेतु अपने नाम सहित हमें भेजिए| हमारा ई-मेल है: चाणक्य प्लेस

Monday, March 5, 2012

बचिए रासायनिक रंगों के खतरों से
कार्टून: चन्दर  visit- http://cartoonholi.blogspot.in/
अपने चेहरे, बाल और शरीर के वे भाग जो रंगों के सम्पर्क में आ सकते हैं उन पर ऑलिव ऑयल या सरसों का तेल लगा लेना चाहिए। ऐसा करने से से एक सुरक्षा पर्त बन जाती है। महिलाएं नाखूनों पर गहरे रंग की नेल पालिश लगाएं इससे होली खेलने के बाद रिमूवर से नेल पालिश उतारने पर नाखूनों पर लगा रंग भी उतर जाएगा। यदि कोई चेहरे पर गाढ़ा रंग लगा दे तो तो चेहरे को तुरन्त सादा पानी से धो लें। इससे चेहरे पर रंग का असर गहरा नहीं हो पाएगा और चेहरा आसानी से साफ हो जाएगा।
रंग उतारने के लिए कभी त्वचा को बहुत ज्यादा न रगड़ें। बार-बार नहाना और चेहरा धोना भी ठीक नहीं। त्वचा पर जहां गहरे निशान पड़ गये हों वहां हलके हाथ से नीबू का छिलका रगड़ें। खटाई या अमचूर पाउडर पानी में घोलकर त्वचा पर रगड़ने से भी रंग का प्रभाव कम हो जाता है।
आप स्वयं होली खेलने के लिए प्राकृतिक रंगों का प्रयोग करें और दूसरों को भी प्रेरित करें।विशेष रूप से बच्चों पर भी नजर रखें। आजकल बाजार में अच्छी गुणवत्ता वाले और प्राकृतिक पदार्थों से बने रंग-गुलाल आसानी से मिल जाते हैं। आप चाहें तो थोड़ी सूझबूझ से खुद घर में ही रंग बना सकते हैं।
हर्बल रंग
हरा रंग- मेहंदी के पत्तों को सुखाकर पीसकर रख लें। इस पाउडर को रातभर पानी में भिगोकर रखें। हरा रंग तैयार हो जाएगा। इसमें आटा या मैदा मिला देने से रंग का लाइट शेड बनाया जा सकता है। पालक और धनिया जैसी सब्जियों का प्रयोग भी रंग बनाने में किया जा सकता है।
लाल रंग- लाल चन्दन पाउडर या सिन्दूर उपयोग किये जा सकते हैं। गुलाब की सूखी पंखुडि़यां, लाल गुड़हल के फूलों को पानी में भिगोकर भी रंग बनाया जा सकता है। चुकन्दर को कद्दूकस करके या पीसकर भी शानदार रंग बनाया जा सकता है।
नीला रंग- जकरन्दा या नीली अड़हुल जैसे फूलों को पीसकर बढि़या नीला रंग तैयार किया जा सकता है। इण्डिगो पेड़ की फली (बेरी) को पीसकर भी नीला रंग बनाया जा सकता है। इसमें उपयुक्त मात्रा में पानी मिलाकर उपयोग किया जा सकता है।
पीला रंग- बेसन में पिसी-छनी हल्दी (पाउडर) मिलाकर जोरदार पीला रंग बनाया जा सकता है।
रंगों में मिले रसायन
काला- लैड ऑक्साइड- गुर्दे के लिए हानिकारक,
हरा- कॉपर सल्फेट- आंखों में खुजली, अस्थायी अंधापन,
रजत (सिल्वरद)- एल्यूमीनियम ब्रोमाइड- कैंसर,
लाल- मरकरी ;पाराद्ध सल्पफेट- त्वचा में खुजली, क्रोमियम, कैडमियम युक्त होने पर- बुखार,  अस्थमा, निमोनिया, एलर्जी, आदि
अतः कड़ाई से इन रंगों से बचें। रासायनिक रंगों का खुद उपयोग न करें और दूसरों को इनका उपयोग न करने को कहें। बच्चों को भी समझाएं और उन पर नजर रखें। थोड़ी सूझबूझ से घर में ही प्राकृतिक रंग तैयार करें और होली के प्रेम भरे पावन पर्व को सुरक्षित व सही ढंग से मनाएं।
इस होली महोत्सव में प्रति व्यक्ति कम से कम एक पेड़ अवश्य लगाए। जमीन नहीं है तो गमले में ही कोई नया पौधा लगाएं। यदि अभी तक आपके यहां तुलसी नहीं है तो बहुउपयोगी तुलसी का एक पौधा लगाना न भूलें।
मंजू गोपालन
देखें- मीडिया नेटवर्क भजन कीर्तन कार्टून होली  

No comments:

योग

चाणक्य प्लेस में पढ़िए

चिट्ठा सूची